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शिक्षा

छात्रवृत्ति — प्रोजेक्ट इक़रा

इक़रा का अर्थ है “पढ़ो”

पढ़ाई में जुटे विद्यार्थी
पढ़ाई में जुटे विद्यार्थी

धोराजी मेमन विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क शिक्षा — ताकि पैसा कभी पढ़ाई रुकने की वजह न बने।

इक़रा — यानी “पढ़ो” — क़ुरआन-ए-करीम का पहला नाज़िल हुआ शब्द है, और यही नाम ट्रस्ट ने अपने छात्रवृत्ति कार्यक्रम को दिया है। इसके पीछे सोच बहुत सीधी है: किसी होनहार बच्चे की पढ़ाई सिर्फ़ इसलिए न रुके कि फ़ीस नहीं भरी जा सकी।

प्रोजेक्ट इक़रा मेमन विद्यार्थियों की स्कूल, जूनियर कॉलेज और उच्च शिक्षा में मदद करता है। हर आवेदन पर अलग से विचार होता है, और जब तक विद्यार्थी पढ़ता रहता है, मदद हर साल जारी रहती है। जहाँ मुमकिन हो, रक़म सीधे संस्थान को दी जाती है, ताकि वह कक्षा तक पहुँचे।

आवेदन का कोई शुल्क नहीं है और कुछ लौटाना नहीं होता। परिवार से सिर्फ़ फ़ीस की रसीद, पिछली मार्कशीट और पते का प्रमाण माँगा जाता है।

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छात्रवृत्ति जहाँ पहुँचाती है
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कॉलेज तक
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मुंबई में ट्रस्ट द्वारा संचालित कक्षाएँ, कोचिंग, पुस्तकालय और कंप्यूटर प्रशिक्षण कक्ष।

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